सरदार वल्लभ भाई पटेल जी की जयंती पर भाषण

सरदार वल्लभ भाई पटेल जी की जयंती पर भाषण

नमस्कार आज हम बात करने जा रहे हैं। इस मां भारती की धरा कि लगभग 562 छोटी बड़ी रियासतों का एकीकरण कर स्वतंत्र भारत संघ को नया रूप देने वाले उस लौह पुरुष भारत के बिस्मार्क शेर ए हिंदुस्तान सरदार वल्लभ भाई पटेल जी के बारे में साथियों पटेल जी का जन्म 31 अक्टूबर 1875 को गुजरात राज्य के नाडियाड में उनके ननिहाल में हुआ था। उनके इस जन्म दिवस को भारत भूमि पर एकता दिवस के रुप में मना कर उनको याद किया जाता है। वे गुजरात में खेड़ा जिले के कारमसद के निवासी एक किसान झावेर भाई पटेल की चौथी संतान थे।उनकी माता का नाम लाडबा पटेल था व उनकी जीवनसंगिनी का नाम झावेरबा था। उन्होंने 22 साल की उम्र में दसवीं कक्षा पास की वह पढ़ाई को आगे जारी रखते हुए लंदन से बैरिस्टर की डिग्री ग्रहण की। साथियों पटेल जी में नेतृत्व के गुण बाल्यावस्था से ही थे। उन्होंने अपने प्रारंभिक शिक्षा काल में ही एक ऐसे अध्यापक के विरुद्ध आंदोलन खडा कर उन्हें सही मार्ग दिखाया जो अपने ही व्यापारिक संस्थान से छात्रों को पुस्तके खरीदने के लिए बाध्य किया करते थे। पटेल जी श्रीमद् भागवत गीता में भगवान श्री कृष्ण जी द्वारा उल्लेखित कर्म के सिद्धांतों पर आजीवन अमल करते थे। जब वह एक वकील का दायित्व निभा रहे थे। तब उन्होंने इन कर्म के सिद्धांतों की एक अनूठी मिसाल पेश की पटेल जी जज के सामने अपने एक मुवक्किल के केस के लिए जिरह कर रहे थे। तभी उन्हें एक टेलीग्राम मिला। उन्होंने देखा और जेब में रख लिया। उस टेलीग्राम में उनकी पत्नी के निधन की खबर थी। बहस पूर्ण हो जाने पर न्यायाधीश व अन्य लोगों ने यह दुखद खबर सुन कहा पटेल जी आपको 2 घंटे पहले ही चले जाना चाहिए था। पटेल जी ने कहा कि मैं उस समय मेरा कर्म कर रहा था  मैं मेरा फर्ज निभा रहा था जिसके लिए मुझे फीस दी गई थी। मैं मेरे मुवक्किल के साथ अन्याय कैसे कर सकता हूं। साथियों ऐसे कर्तव्यनिष्ठ और शेर जैसे कलेजे की मिसाल इतिहास में विरले ही मिलते हैं।  इस महापुरुष ने हमारे राष्ट्र के एकीकरण व स्वतंत्रता संग्राम में साम दाम दंड भेद की नीतियों को अपनाते हुए। अपना अतुल्य योगदान दिया है जिनमें किसानों के कर में छूट दिलाने के लिए खेड़ा व बारडोली सत्याग्रह जहां पर उनको बारडोली की महिलाओं द्वारा सरदार की उपाधि दी गई थी। उन्हे असहयोग आंदोलन व नमक सत्याग्रह आदि के पक्ष में प्रचार करने के कारण जेल भी जाना पड़ा। पटेल जी के राजनीतिक सफर कि अगर बात की जाए। तो वह 15 अगस्त 1947 को देश के पहले उप प्रधानमंत्री व गृह मंत्री बने। व 15 फरवरी 1948 को भावनगर राज्य संघ की स्थापना कर भारत संघ के एकीकरण की तरफ कदम बढ़ा। स्वतंत्र भारत संघ के शिल्पकार होने का गौरव प्राप्त किया। इतना ही नहीं उन्होंने हमारा आइन कहे जाने वाले संविधान के निर्माण में मूल अधिकार समिति का अध्यक्ष रहकर महती भूमिका निभाई। व सरदार वल्लभ भाई पटेल जी जीवन में सदैव शांतिप्रिय रहने के पक्षधर थे। उनका कहना था कि “शत्रु का लोहा भले ही गर्म हो जाए लेकिन हथोड़ा तो ठंडा ही काम देता है”लेकिन साथियों 15 दिसंबर 1950 को यह महान आत्मा अपने नश्वर शरीर को त्याग कर सदा सदा के लिए अमर हो गई मरणोपरांत भारत सरकार ने उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया। इन्हीं शब्दों के साथ मैं आपका सभी का धन्यवाद करते हुए अपनी वाणी को विराम देती हूं

जय हिंद जय भारत           इस भाषण को सुनने के लिए दिए हुए लिंक पर क्लिक करेंhttps://youtu.be/pfoXE2Pll18

Updated: October 6, 2018 — 6:35 pm

The Author

लेखक:- सविता रामभरोसे

नमस्कार वेबसाइट बाल संसार हिंदी में आपका स्वागत है।सविता जी जिन्होंने हिंदी विषय से  स्नातकोत्तर व बीएड की डिग्री अर्जित की है।श्री रामभरोसे जी ऐसे हैं। भई रामभरोसे 1998 में किसी तरह दसवीं कर पाये ,2006 में 12वीं कर आये, 2012 में स्नातक कर पाये, 2014 में अंग्रेजी साहित्य से स्नातकोत्तर की डिग्री ले आये। आर्टिकल में सब लिखने के बाद सविता जी से चेक करवाये बाल संसार हिंदी के वेब डेवलपर कंटेंट राइटर लेखक सभी की भूमिका यह अकेले ही निभाये। बस इतना ही है। कि आप इनके नाम से परिचित हो जाएं रामभरोसे समझकर इनका साथ निभाएं धन्यवाद

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