poem on father’s day

साथियों एक पिता के घर आंगन में पिता रूपी वटवृक्ष की छाया में पल बड़ी होने के बाद शादी कर पराई हुई लड़की की व्यथा को दर्शाती यह कविता:

पापा यह नन्ही सी बच्ची आपके घर आंगन में पली-बढ़ी, आज आपकी यह बच्ची बढ़कर आपसे इतनी दूर खड़ी।

पापा आप ने सिखलाया था यह दुनिया बहुत छोटी है, बेटी तारे तोड़ लाना गगन से मेहनत करने से मंजिल मिलती है बेटी तू कभी ना रुकना, कभी ना झुकना,डरना मत दो जीवन के जंजालों से, तेरे पापा सदैव तुझे याद रखेंगे तेरे उज्जवल भविष्य के ख्यालों से। आप कहां करते थे बेटी तुझे सूरज से भी है आगे जाना, एक लड़की के वजूद का मोल है क्या यह तो दुनिया को बतलाना। अब बड़ी होने पर पापा मेरी मंजिल और आवाज है, हर किसी के कानों में, पर पापा मैं क्या बताऊं आप के घर वाली मेरी शान नहीं है इन पराये मेहमानों में। याद है मुझको जब हम शाम को घूमने जाते थे, हम तुम दोनों मिलकर साथ में गाना गाते थे। मेरी नटखट बातों पर आप खिलखिलाकर हंस जाते थे,। कच्चे-पक्के उन फलों को हम साथ मिलकर खाते थे। अब इस पराये घर में एसी, कार सब ठाठ बाट है दिखाने को, लेकिन आपके आंगन के जैसा प्यार नहीं है पाने को। मेरी एक छोटी सी गलती स्वीकार नहीं अपनाने वालों को। सोचती हूं वह दिन भी फिर कभी अब लौट कर आएंगे, पापा जब हम तुम दोनों साथ मिलकर फिर से गाना गाएंगे। बेटी के लिए सदा रहे बाप का आंगन क्या हम ऐसी रीत बना पाएंगे । धन्यवाद

वीडियो देखने के लिए दिए गए लिंक पर क्लिक करें-https://youtu.be/w4a6qMDYdfQ

Updated: August 22, 2019 — 5:34 pm

The Author

लेखक:- सविता रामभरोसे

नमस्कार वेबसाइट बाल संसार हिंदी में आपका स्वागत है।सविता जी जिन्होंने हिंदी विषय से  स्नातकोत्तर व बीएड की डिग्री अर्जित की है।श्री रामभरोसे जी ऐसे हैं। भई रामभरोसे 1998 में किसी तरह दसवीं कर पाये ,2006 में 12वीं कर आये, 2012 में स्नातक कर पाये, 2014 में अंग्रेजी साहित्य से स्नातकोत्तर की डिग्री ले आये। आर्टिकल में सब लिखने के बाद सविता जी से चेक करवाये बाल संसार हिंदी के वेब डेवलपर कंटेंट राइटर लेखक सभी की भूमिका यह अकेले ही निभाये। बस इतना ही है। कि आप इनके नाम से परिचित हो जाएं रामभरोसे समझकर इनका साथ निभाएं धन्यवाद

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