ESSAY ON DUSSHERA IN HINDI दशहरा पर्व पर निबंध व कविता

 

 

 

 

 

 

 

दशहरा पर्व पर निबंध व कविता

नमस्कार आज हम बात करेंगे विजयदशमी यानी दशहरा पूजा के बारे में। साथियों दशहरा आश्विन माह के दसवे दिन शुक्ल पक्ष में मनाया जाता है ।दशहरा त्योहार हमें सिखाता है की, बुराई चाहे कितनी ही बड़ी व शक्तिशाली क्यों न हो आखिर उसे अच्छाई से हारना ही होता है। अगर देखा जाए तो दशहरा शब्द की उत्पत्ति संस्कृत भाषा के शब्द दश-हर से हुई है। जिसका शाब्दिक अर्थ दस बुराइयों से छुटकारा पाना है। अखंड भारत वर्ष में इस पर्व को लेकर अलग-अलग धारणाएं हैं। उत्तर भारत में इसे श्रीलंका के राजा रावण पर भगवान श्री राम की विजय के रूप में व दक्षिण भारत में दैत्य राजा महिषासुर पर देवी दुर्गा की विजय के रूप में देखा जाता है। व अलग-अलग प्रांतों जैसे तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश व कर्नाटक में नौ दिन तक लक्ष्मी, सरस्वती और दुर्गा तीनो देवियों की पूजा की जाती है। वही बंगाल, उड़ीसा व असम में यह पर्व दुर्गा पूजा के रूप में, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान व उत्तर भारत के अन्य राज्यों में नौ दिन नवरात्रि का उपवास रखकर दसवे दिन विजयदशमी के रूप में मनाया जाता है। कश्मीर के अल्पसंख्यक हिंदू इस दिन माता खीरभवानी के दर्शन कर पूजा करते हैं। वही हिमाचल प्रदेश में इस दिन रघुनाथ जी की पूजा की जाती है। व गुजरात में गरबा व डांडिया नृत्य कर इस पर्व की खुशी मनाई जाती है।व मैसूर में इस दिन पूरे शहर, मैसूर की गलियों व मैसूर महल को रोशनी से शोभित किया जाता है। व बस्तर में इस पर्व पर मां दंतेश्वरी की आराधना की जाती है। वही महाराष्ट्र में इस पर्व को सिलंगण महोत्सव के रूप में मनाया जाता है। विजयदशमी के दिन किसान अपने औजारों की व सैनिक अपने हथियारों की पूजा भी करते हैं। व इसी दिन मराठा रत्न छत्रपति शिवाजी महाराज ने भी औरंगजेब के खिलाफ युद्ध का बिगुल बजाया था। वही बहुत से स्थानों पर मेलों का आयोजन किया जाता है। जहां रावण, कुंभकर्ण व रावण पुत्र मेघनाथ का दहन कर विजयदशमी मनाते हैं।लेकिन साथियों कुछ वर्षों पहले तक इस पर्व पर लोग आस-पड़ोस, रिश्तेदारों व समाज के लोगों के बीच जाकर शमी-पत्र दे अपने से बड़ों का आशीर्वाद प्राप्त करते थे। व उम्र में बराबर वाले लोगों से गले मिल खुशियां बांटते थे। जिससे रिश्तो को मजबूती मिलती थी। व भाईचारा बढ़ता था। वही आज के दिन त्योहारों के बदलते रूप में दिखावे के लिए महंगे तोहफे व मिठाइयों का आदान-प्रदान कर फिजूलखर्ची को बढ़ावा दे त्योहार प्रतिस्पर्धा का रूप ले चुके हैं। पटाखे फोड़कर पर्यावरण प्रदूषण की नई बुराई को जन्म देकर बुराइयों पर अच्छाई की जीत का जुमला हम सब सुना रहे हैं ।आज के हालातों पर यह कविता कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी।

कविता

आज हम हो गए ऊंचे रावण, बोना रह गया राम।

मेरे देश की त्योहार प्रेमी ,जनता तुझे सलाम ।

राम नाम सब व्यर्थ हो गया, जिंदा रह गया रावण सा अभिमान ।

कुंभकर्ण और मेघनाथ की ,बुराइयों का तो रह गया सिर्फ नाम ।

बलात्कार ,भ्रष्टाचार चोरी, व्याभिचार आदि हम कर रहे रावण से भी घृणित काम ।

अच्छे दिन जो एक सपना बनाहैं जिसे देख रहे हैं हम सब आज ।

रक्षक ,सेवक, अफसर सभी व्यवस्थाओं में फैला गुण्डाराज ।

रावण ने भी नहीं किया था ,पर- नारी को छूने का दुस्साहस ।

हम तो उस रावण से भी आगे निकले ,जिन्होंने छुड़वा दी छोटी-छोटी बालाओं को भी जिंदा रहने की आस ।

मौज मनाओ नाचो- गाओ, खुशी मनाओ आज ।

रावण भी सोचता होगा इस युग में, मैं होता तो सिर  पर ओढता बादशाहो का ताज ।

पटाखे फोड़ो जश्न मनाओ लेकिन छोड़ दो बुराइयों पर विजय पाने कि आस ।

वह दिन भी अब दूर नहीं जब प्रदूषण से रूकने लगेगी तुम्हारी सांस ।

आप सभी को विजय पर्व की  बहुत-बहुत शुभकामनाएं। लेकिन साथियों बोलने व सुनने तक ही सीमित न रहकर हमें जरूरत है। प्रदूषण व बुराइयों को कम कर खुशहाल भारत वर्ष के निर्माण की । जय हिंद जय भारत ।

इस निबंध व कविता को सुनने के लिए दिए हुए लिंक पर क्लिक करें:- https://www.youtube.com/watch?v=8Frtzul11NA&t=52s

Updated: October 3, 2018 — 11:42 am

The Author

लेखक:- सविता रामभरोसे

नमस्कार वेबसाइट बाल संसार हिंदी में आपका स्वागत है।सविता जी जिन्होंने हिंदी विषय से  स्नातकोत्तर व बीएड की डिग्री अर्जित की है।श्री रामभरोसे जी ऐसे हैं। भई रामभरोसे 1998 में किसी तरह दसवीं कर पाये ,2006 में 12वीं कर आये, 2012 में स्नातक कर पाये, 2014 में अंग्रेजी साहित्य से स्नातकोत्तर की डिग्री ले आये। आर्टिकल में सब लिखने के बाद सविता जी से चेक करवाये बाल संसार हिंदी के वेब डेवलपर कंटेंट राइटर लेखक सभी की भूमिका यह अकेले ही निभाये। बस इतना ही है। कि आप इनके नाम से परिचित हो जाएं रामभरोसे समझकर इनका साथ निभाएं धन्यवाद

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