दुर्गा पूजा पर निबंध ।। Essay on Durga Puja in hindi

प्रस्तावना

दुर्गात्सव मतलब दुर्गा पूजा भारतवर्ष में मनाए जाने वाला एक धार्मिक त्यौहार है। दुर्गा देवी जो कि शक्ति का अवतार हिमालय और मेनका की पुत्री थी। और बाद में उनकी शादी भगवान शिव से हुई थी। दुर्गा पूजा मनाना सर्वप्रथम भगवान राम ने रावण को मारने के लिए देवी दुर्गा से शक्ति प्राप्त कर उनकी पूजा करने के बाद से शुरू किया गया। दुर्गा पूजा का त्यौहार हिंदू धर्म के लोगों द्वारा हर वर्ष उत्साह और विश्वास के साथ मनाया जाता है।जो कि हिंदुओं के महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। यह हर साल पतझड के मौसम में आता है। दुर्गा पूजा के त्यौहार को भारतवर्ष के हर गांव और शहर में सांस्कृतिक व परंपरागत तरीके से मनाया जाता है।

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दुर्गा पूजा के नाम व मान्यताएं

दुर्गा पूजा के नाम:- दुर्गा पूजा को बिहार उड़ीसा दिल्ली मध्य प्रदेश वेस्ट बंगाल में दुर्गा पूजा के नाम से जाना जाता है।वही बंगाल असम व उड़ीसा में अकालबोधन दुर्गा का असामयिक जागरण शरद कालीन पूजा, बांग्लादेश में दुर्गा पूजा को भगवती पूजा के रूप में भी मनाया जाता है। दुर्गा पूजा के दिन लोग दुर्गा देवी की पूरे 9 दिन तक पूजा कर अंत में दुर्गा देवी की मूर्तियों व प्रतिमा को पानी में विसर्जित करते हैं व बहुत से लोग 9 दिन तक उपवास रखते हैं। और कुछ लोग केवल पहले और आखिरी दिन उपवास रखते हैं। लोगों का मानना है कि इससे देवी दुर्गा प्रसन्न होकर उन्हें आशीर्वाद देती है। और उन्हें सभी समस्याओं और नकारात्मक उर्जा से दूर रखती है।

दुर्गा पूजा की कहानी

कहा जाता है कि एक बार महिषासुर नाम का एक राजा था। इस राजा ने स्वर्ग में देवताओं पर आक्रमण किया। जोकि महिषासुर एक बहुत ही शक्तिशाली राजा था जिसे कोई भी नहीं हरा सकता था। इस आक्रमण के समय ब्रह्मा विष्णु और शिव भगवान ने एक आंतरिक शक्ति का निर्माण किया जिसका नाम दुर्गा रखा गया था। इस देवी दुर्गा की शक्ति को महिषासुर का विनाश करने के लिए प्रयोग में लिया गया। जिसमें देवी दुर्गा ने महिषासुर के साथ पूरे 9 दिन तक युद्ध किया और अंततोगत्वा दसवें दिन महिषासुर को मार गिराया। तब से दसवें दिन को दशहरा या विजयदशमी के रूप में मनाया जाता है। वही रामायण के अनुसार भगवान श्री राम ने रावण को मारने के लिए दुर्गा देवी की पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लेने के लिए चंडी पूजा की थी। व श्री राम ने दुर्गा पूजा के दसवें दिन रावण को मारा था तभी से इस दिन को विजयदशमी कहा जाता है इसलिए देवी दुर्गा की पूजा हमेशा बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक मानी जाती है।

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दुर्गा पूजा पर सांस्कृतिक उत्सव

दुर्गा पूजा के त्यौहार के लिए पूजा शुरू होने के लगभग 2 महीने पहले से ही तैयारियां शुरू हो जाती है। बाजारों में कपड़े गहने व हस्तशिल्प आदि से बनी हुई वस्तुओं की भरमार होती है।चारों तरफ बाजारों में दुकानें सजने लगती हैं। वहीं 3 से 4 महीने पहले मूर्तिकार मूर्तियां बनाना शुरु कर देते हैं। वहीं बहुत से गांव व शहरों में नाटक और रामलीला जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। इन दिनों में पूजा के दौरान लोग दुर्गा पूजा मंडप में फूल नारियल अगरबत्ती और फल लेकर जाते हैं और मां दुर्गा का आशीर्वाद ले सुख व समृद्धि की कामना करते हैं।

वर्तमान युग में दुर्गा पूजा के प्रभाव

इस त्यौहार पर बढ़ते हुए आधुनिकीकरण के कारण लोग लापरवाही से पर्यावरण को बुरी तरह से दूषित कर रहे हैं।जहां पर देवी दुर्गा की प्रतिमा को बनाने और रंगने में जिन पदार्थों का उपयोग किया जा रहा है। व स्थानीय पानी के स्रोतों में प्रदूषण का कारण बन रहे हैं।वही केमिकल से बनी हुई मूर्तियों को सीधे नदी के पानी में विसर्जित कर नदियों को गंदा किया जा रहा है।इस परंपरा को निभाने के लिए हमें कोई अन्य सुरक्षित तरीका निकालना चाहिए।

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उपसंहार

दुर्गा पूजा उत्सव से लोगों की मान्यता है कि इस उत्सव को मनाने से बुराइयों का नाश होता है।जिस प्रकार देवी दुर्गा ने सभी देवी देवताओं की शक्ति को इकट्ठा करके दुष्ट राक्षस महिषासुर का नाश किया था। और धर्म को बचाया था। इसी प्रकार हम लोगों को अपनी सभी बुराइयों पर विजय प्राप्त करके मनुष्यता को बढ़ावा देना चाहिए। यही दुर्गा पूजा का सही संदेश है।

वीडियो देखें:-https://www.youtube.com/channel/UC1RERcLmvj6uo0TS0hW7kmQ

The Author

लेखक:- सविता रामभरोसे

नमस्कार वेबसाइट बाल संसार हिंदी में आपका स्वागत है।सविता जी जिन्होंने हिंदी विषय से  स्नातकोत्तर व बीएड की डिग्री अर्जित की है।श्री रामभरोसे जी ऐसे हैं। भई रामभरोसे 1998 में किसी तरह दसवीं कर पाये ,2006 में 12वीं कर आये, 2012 में स्नातक कर पाये, 2014 में अंग्रेजी साहित्य से स्नातकोत्तर की डिग्री ले आये। आर्टिकल में सब लिखने के बाद सविता जी से चेक करवाये बाल संसार हिंदी के वेब डेवलपर कंटेंट राइटर लेखक सभी की भूमिका यह अकेले ही निभाये। बस इतना ही है। कि आप इनके नाम से परिचित हो जाएं रामभरोसे समझकर इनका साथ निभाएं धन्यवाद

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