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महामारी कोरोना पर संदेश कविता

सारे जगत में कोहराम मचा रही है महामारी कोरोना
बिना मास्क बेवजह घर सेेे बाहर पैर धरोना
लापरवाही कर असमय मरो ना
इस दुख की घड़ी में कालाबाजारी कर तिजोरियोंं को भरो ना
कालाबाजारी करते समय उस वाहेगुरु अल्लाह ईश्वर परमात्माा से डरो ना
सारा दोष सरकारों पर मंढो ना
मानवता के लिए मानव होने का खुुद भी फर्ज अदा करो ना
दैनिक जरूरत से ज्यादा खानेे-पीने का सामान ला घर को भरो ना
कम पैसे वाले गरीब मजदूरों के पेट का ख्याल करो ना
हर चौक चौराहे पर खड़े वर्दीधारियों का सहयोग करो
देेश हित में लॉक डाउन का पालन करो ना
आपकी सुरक्षा में समर्पित हर व्यक्ति में साहस भरो ना
इतना भी तुुम डरो ना इस समय एक शहर से दूसरेे शहर पलायन करो ना
युगो युगो से इस सत्य को सुनते आये हो हमारा शरीर नश्वर है।
फिर मरने से इतना डरो ना
जिस अदृृश्य शक्ति से तुम जिंदा हो उस पर विश्वास करो ना
इस समय तुम भयभीत हो डरो ना
सरकार की एडवाइजरी का आप पूर्णतया पालन करो ना
लापरवाही कर असमय मरो ना
आप की सजगता सेेेेे भाग जाएगा यह कोरोना
यह संदेश सभी को शेयर कर जागृत करो ना
जय हिंद जय भारत


वीडियो देखने के लिए क्लिक करें
https://youtu.be/hkTrXIQFPUc

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर कविता

नारी यह नारी जिसकी दिन की रोशनी 
घर परिवार को बसाने में गुजर गई
रात की नींद बच्चों को सुलाने में गुजर गई
जिस पति केेे घर में उसके नाम कि तख्ती भी नहीं
इसकी सारी उम्र उस घर को सजाने में गुजर गई।

नारी फिर भी नारी तू सम्मान है, तू अभिमान है।
इस संसार में खुशियांं भरने वाली, तू एक महान है।
होती बहुत अग्नि परीक्षाएं है तेरी, लेकिन कोई नहीं जानना चाहता क्या इच्छाएं है तेरी ।
तेरे ऊपर आज भी बहुत अत्याचार है,
जबकि तेरेे सहारे ही बसता पूरा घर परिवार है।
तू आज भी है दहेज के लिए जलाई जाती,
असहाय और अबला कहलाती।
तू चुप रह सब सह जाती, फिर भी तू इतिहास बनाती।
हिमा , नीरजा, कल्पना, अनीता बन जाती।
गीता, बबीता, रितु ,संगीता बन तिरंगा लहराती।
मैरी कॉम बन पंच लड़ाती। संघर्ष कर अपनी पहचान बनाती।
नारी फिर भी नारी तू सम्मान है, तू अभिमान है।
इस संसार में खुशियांं भरने वाली, तू एक महान है।
धन्यवाद अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

वीडियो देखने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें-https://youtu.be/5AANXKqC1Zg

chhatrapati shivaji Maharaj par Kavita ।।छत्रपति शिवाजी महाराज पर कविता

महान मराठा योद्धा छत्रपति शिवाजी महाराज ने 19 फरवरी 1630 को जन्म लिया। उन्होंने अपने पराक्रम व प्रतिभा से ममतामयी मां जीजाबाई व पिता शाहजी भोंसले को गौरवान्वित किया। बचपन से ही छत्रपति शिवाजी महाराज को दादा कोण देव ने युद्ध विद्या में निपुण बना दिया। शिवाजी ने सिंधु गढ़ और विजयदुर्ग को नौसेना के लिए तैयार किया। उनकी गोरिल्ला रणनीति ने मुगलों को डरा दिया। अपनी बुद्धिमानी, शौर्य, वीरता, युद्ध कुशलता से मुगलों को पराजित किया। आदिल शाह की विधवा बेगम द्वारा भेजे गए अफजल खां के पेट में बगनखा घुसेड़ उसका वध किया। प्रतापगढ़ तथा रायगढ़ दुर्ग जीतकर रायगढ़ को मराठा साम्राज्य की राजधानी बना दिया।इस तरह मराठा साम्राज्य का दबदबा दुनिया में कायम कर यह वीर मराठा योद्धा तेज बुखार के कारण 3 अप्रैल 1680 को अमरत्व को प्राप्त कर स्वर्ग सिधार गया।
छत्रपति शिवाजी महाराज अमर रहें।
धन्यवाद
वीडियो देखनेेे के लिए लिंक पर क्लिक करें:-https://youtu.be/O6tXrXJMA2Y


वैलेंटाइन डे पर कविता

हादसे रुह में उतर मसखरी करते हैं,
लफ्ज़ कागज़ पर उतर कर जादूगरी करते हैं।
जो सुख-दुख में साथ दें वो प्यार केे रिश्ते,
दिल में घर बनाया करते हैं।
एक दिन के प्यार का दिखावा करने वाले रिश्ते,
अक्सर टूट जाया करते हैं।
प्यार एहसास है जो जीवन की बगिया को महकाता है।
प्यार वह रिश्ता है जो एक दूसरेेेे जीव का समर्पण कहलाता है।
यह प्यार भााई-बहन ,माता-पिता ,
दोस्तों के सुख-दुख में हर पल देखा जाता है।
एक प्यार वैलेंटाइन डे को प्रकट हो जााता है,
जो सिर्फ लड़का लड़की में देखा जाता है,
यह अक्सर दैहिक वासना को दर्शाता है।
रोज डे, प्रपोज डे, चॉकलेट डे, टेडी बियर डे, प्रॉमिस डे
हग डे, किस डे प्यार जैसे पवित्र एहसास का
बाजारीकरण कर जाताा है।
इन वैलेंटाइन डे वालों का हर साल प्राय
वैलेंटाइन बदल जाता है।
इस दिन का दिखावा जीवन में समर्पित
रिश्तो के प्यार के सामने फीका पड़़ जाता है।
जीवन केेे सुख-दुख में हर पल साथ निभानें वाला वैलेंटाइन कहलाता है।

वीडियो देखने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें-https://youtu.be/Dn3oQs27_9s


वसंत पंचमी पर कविता

ऋतुएं आएं ऋतुएं जाएं,  
जीवन में ये बहार लायें।
बसंत ऋतु में मन हर्षाए,
चारों तरफ प्रकृति खिल खिलाए।
फूलों पर भंवरे मंडरायें,
परिवर्तन का पाठ पढ़ाएं
ऋतुएं आएं ऋतुएं जाएं,
कुदरत अपना रंग दिखाए।
हर कली फूल बन जाए। बसंत ऋतु जब- जब आए
जीवन की बगिया महकाए
डाल-डाल पंक्षी चहकाएं
फूलों में खुशबू भर आए,
आओ बसंत का लुत्फ उठाएं ।
बसंती रंगों में घुल जाएं,
हम नित नये हुनर सीख पाएं
दुनिया में हम छा जाएं,
आओ हम सब मिल बसंत पंचमी मनाएं
ऋतुएं आएं ऋतुएं जाएं।

वीडियो देखने के लिए क्लिक करें-https://youtu.be/bTLxGVV68Ng

Bal diwas par Kavita।। बाल दिवस पर कविता।। Poem on children’s day in Hindi

बाल दिवस पर रहे बच्चे खेल,चारों तरफ है रेलम पेल।
 नेता कर रहे संवाद, बच्चों की करो देखभाल।
 सब बच्चों की करो संभाल, हर बच्चा हो मालामाल।
 लेकिन बाल मजदूरों का, नहीं आता किसी को ख्याल।
 कर्मचारी, अधिकारी, व्यापारी सब बने दलाल,
 जो खा जाते गरीब बच्चों का माल।
 फैक्ट्री के मालिक करते बाल मजदूरों को हलाल,
 कम पैसे दे काम कराते सालों साल,
 बाल मजदूर का नहीं आता किसी को ख्याल।
 बाल श्रमिक करता है यह सवाल?
 हमें क्यों नसीब नहीं होती रोटी दाल,
 कौन चलता है नई-नई चाल।
 बाल दिवस पर भाषण दे, नेता बजाता अपने गाल ।
 बाल मजदूर का है, देश में हाल बेहाल।
 बाल दिवस पर करो पहले इनका ख्याल।
 बाल दिवस पर करो पहले इनका ख्याल।
वीडियो देखें:-https://youtu.be/qvpy4SqQbtU

बाल दिवस कविता 2

वह बचपन कहां आधुनिकता में मर गया
नेहरु चाचा भी बच्चों के लिए बहुत कुछ कर गया
वह बचपन कहां आधुनिकता में मर गया
पहले वाला समय अब तर गया
आज दूध में मुंहे बच्चे में भी ज्ञान भर गया
मां के स्तन का दूध बिना मिले
ही बोतल का दूध असर कर गया
वह बचपन कहां मर गया
वह बचपन कहां मर गया
मेरे स्कूल का बैग इतना भर गया
कि मैं एलकेजी में ही डर गया
घर गली मोहल्ले में बचपन ही अब मर गया
पबजी का खेल बचपन पर अपना घर कर गया
खेल के मैदानों से बच्चा अब डर गया
आज का बच्चा गली में खड़े कुत्ते को
ही देख कर डर कर अपने घर गया
इस आधुनिकता मेंं बचपन कहां मर गया
बचपन कहां मर गया
बाल दिवस पर भी हर कोई आया
और दो चार लाइनों में बचपन की बातें कर गया
पर हकीकत में तो बचपन अब मर गया
बचपन अब मर गया।
वीडियो देखें -https://youtu.be/zEgmm76GQPk