14 नवंबर बाल दिवस पर भाषण

बाल दिवस हमारे देश भारत के प्रथम प्रधानमंत्री श्री पंडित जवाहरलाल नेहरु जी का बच्चों के प्रति अटूट प्रेम होने के कारण उनके जन्मदिवस 14 नवंबर को बाल दिवस के रूप में मना कर उनको याद किया जाता है। साथियों सर्वविदित है कि नेहरू जी  प्रौढ़ व युवाओं से ज्यादा स्नेह व महत्व बच्चों को दिया करते थे ।इसलिए बच्चे उन्हें चाचा नेहरू कहा करते थे। चाचा नेहरू यूं तो सारे जहां के गुण अपने अंतर्मन में समेटे हुए थे। उन्होंने राष्ट्रीय निर्माण व विश्व भाईचारे की भावना व अहिंसा व समाजवाद की अविरल धारा बहाने का भी पुरजोर प्रयास किया था। व 13 वर्ष की उम्र में ही थियोसोफिकल सोसायटी के सदस्य बने। व 15 वर्ष की उम्र में उन्होंने हैरो स्कूल व ट्रिनिटी कॉलेज से शिक्षा पूर्ण होने पर वहां से लौटने के बाद उन्हें 1918 में होमरूल लीग का सचिव चुन लिया गया। व कुछ समय बाद उन्हें भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अध्यक्ष बना दिया गया। इस स्वर्ण काल में उन्होंने पंचवर्षीय योजनाएं बना जनमानस को राजनीतिक, सांस्कृतिक और आर्थिक  ठहराव के दल- दल से बाहर निकाल भारतवर्ष की तरक्की के नए आयाम स्थापित किए। व वैश्विक स्तर पर भी भारत की पताका फहराने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। जिसमें रंगभेद,उपनि उपनिवेशवाद, साम्राज्यवाद जैसे भेदभावों को दूर करने का श्रेय प्राप्त किया। उनके द्वारा लिखी गई दो पुस्तकें डिस्कवरी ऑफ इंडिया और  ग्लमपसेज ऑफ वर्ल्ड हिस्ट्री जो कि विश्व प्रसिद्ध पुस्तकें हैं।पंडित नेहरु जी बच्चों के प्रिय चाचा होने के साथ-साथ एक सफल राजनीतिज्ञ ,अर्थशास्त्री ,चिंतक व साहित्यकार भी थे। चाचा नेहरू बच्चों को देश का भविष्य मानते थे।और उनका यह मानना सत्य भी है ।क्योंकि आज का जन्मा बच्चा ही भविष्य में एक अच्छा राष्ट्रभक्त नागरिक बन खुशहाल भारतवर्ष का निर्माण कर सकता है ।लेकिन साथियों हमारा महज बाल दिवस पर नेहरू जी व उनका बच्चों के प्रति प्रेम की बातें करना ही उचित नहीं है ।हमें भुखमरी वह बाल शोषण, बाल मजदूरी जैसी वैश्विक समस्याओं पर भी ध्यान देना चाहिए। विश्व भर के आंकड़ों के अनुसार हर साल भूख से मरने वाले 24000 लोगों में 18000 बच्चे हैं ।इसमें एक तिहाई यानी 6000 बच्चे भारतीय हैं ।विडंबना के लिए ये शब्द कोई अतिशयोक्ति नहीं होंगे । एक तरफ हम 14 नवंबर को बाल दिवस मना बच्चों से प्रेम दिखलाते हैं। वहीं दूसरी तरफ 6000 बच्चे तो भूखे रह मर जाते हैं। एक तरफ हम बैठ महलों में छप्पन भोग लगाते हैं। दूसरी तरफ हर चौक चौराहे पर भीख मांगते बच्चे नजर आते हैं। वही एक तरफ हम शादी ब्याह पार्टियों में बचे खाने को फिकवाते हैं।वहीं दूसरी तरफ हर पांडाल समारोह स्थल के बाहर भूखे बच्चे पेट भरने की लालसा में खड़े नजर आते हैं। वहीं एक तरफ हर साल 23 करोड़ टन अनाज 12 करोड़ टन फल व सब्जियां गोदामों में सड़ जाते हैं।वहीं दूसरी ओर मुन्ना चुन्नू छोटू जैसे बच्चे धन्ना सेठों के यहां बर्तन साफ कर भूख के तांडव को सह पाते हैं। एक तरफ हम सफेद कपड़े पहन हम बाल दिवस पर जुमले सुनाते हैं। वहीं दूसरी तरफ हर दिन भूखे बच्चे बढ़ते जाते हैं ।साथियों हमें जरूरत है भारतीय बाल अधिकार कार्यकर्ता बचपन बचाओ आंदोलन के संस्थापक नोबेल शांति पुरस्कार विजेता 11 जनवरी 1954 में विदिशा मध्य प्रदेश में जन्मे श्री कैलाश सत्यार्थी जी के कार्यों से प्रेरणा लेने कि ।व इस सामाजिक बुराई को खत्म करने की। आशा है इस बाल दिवस के मौके पर हम सब इन वैश्विक समस्याओं की तरफ ध्यान देकर एक खुशहाल जहां का निर्माण करेंगे ।जय हिंद जय भारत।

इस भाषण को सुनने के लिए दिए हुए लिंक पर क्लिक करें।

https://youtu.be/riUkjHQ5eVk

 

Updated: August 22, 2019 — 7:00 pm

The Author

लेखक:- सविता रामभरोसे

नमस्कार वेबसाइट बाल संसार हिंदी में आपका स्वागत है।सविता जी जिन्होंने हिंदी विषय से  स्नातकोत्तर व बीएड की डिग्री अर्जित की है।श्री रामभरोसे जी ऐसे हैं। भई रामभरोसे 1998 में किसी तरह दसवीं कर पाये ,2006 में 12वीं कर आये, 2012 में स्नातक कर पाये, 2014 में अंग्रेजी साहित्य से स्नातकोत्तर की डिग्री ले आये। आर्टिकल में सब लिखने के बाद सविता जी से चेक करवाये बाल संसार हिंदी के वेब डेवलपर कंटेंट राइटर लेखक सभी की भूमिका यह अकेले ही निभाये। बस इतना ही है। कि आप इनके नाम से परिचित हो जाएं रामभरोसे समझकर इनका साथ निभाएं धन्यवाद

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