मैं बेटा हूं

मैं बेटा हूं बेटियों से अच्छा नहीं हूं। यह पता है मुझे,
लेकिन इतना निठल्ला भी नहीं हूं जितना समझा है। मुझे,
मेरे दर्द को कौन सुने सब कहते है। रुखसत होती हैं बेटियां।
मगर घर छोड़ परिवार की जवाबदारी निभाते शहर दर शहर भटकता किसी ने ना देखा मुझे।
सिर्फ डोली में बैठ विदा होती दिख पाती है बेटियां।
एक तरफ समाज का यह चेहरा देख अपने आपको कुछ कहना चाहता हूं।
किसी किसी घर में तो सास बहू के झगड़ों के बीच में पिस जाता हूं।
लेकिन कुछ नहीं कह पाता हूं। सिर्फ चुप रह सब सह जाता हूं।
कभी बीवी को बहलाता हूं तो जोरू का गुलाम कहलाता हुं।
कभी मां को समझाता हूं तो नकारा बेटा बन जाता हूं। समझ में नहीं आता मैं क्यों अपने ही घर में पराया समझा जाता हूं।
फिर भी मैं बेटियों से अच्छा नहीं बन पाता हूं। पूरे परिवार को अपने कंधों पर रख मंजिल तक पहुंचाता हूं।
अपने सब दुख दर्द छुपा में अकेले में रो पाता हूं।
क्योंकि मैं अपनी व्यथा किसी को नहीं समझा पाता हूं।
इसीलिए मैं बेटा कहलाता हूं
इसीलिए मैं बेटा कहलाता हुं।

वीडियो देखें:-https://youtu.be/GJnTw9YXVIw

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The Author

लेखक:- सविता रामभरोसे

नमस्कार वेबसाइट बाल संसार हिंदी में आपका स्वागत है।सविता जी जिन्होंने हिंदी विषय से  स्नातकोत्तर व बीएड की डिग्री अर्जित की है।श्री रामभरोसे जी ऐसे हैं। भई रामभरोसे 1998 में किसी तरह दसवीं कर पाये ,2006 में 12वीं कर आये, 2012 में स्नातक कर पाये, 2014 में अंग्रेजी साहित्य से स्नातकोत्तर की डिग्री ले आये। आर्टिकल में सब लिखने के बाद सविता जी से चेक करवाये बाल संसार हिंदी के वेब डेवलपर कंटेंट राइटर लेखक सभी की भूमिका यह अकेले ही निभाये। बस इतना ही है। कि आप इनके नाम से परिचित हो जाएं रामभरोसे समझकर इनका साथ निभाएं धन्यवाद

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