भारतीय लोकतंत्र के महापर्व का उत्‍सव चुनाव

आज हम बात करने जा रहे हैं। लोकतंत्र के महापर्व चुनावों के बारे में। साथियों चुनाव लोकतंत्र का आधार स्तंभ है। और भारतीय लोकतंत्र में चुनाव प्रक्रिया के अलग-अलग स्तर हैं ।लेकिन मुख्य तौर पर पूरे भारतवर्ष में संविधान में किए गए प्रावधानों के अनुसार एक लोकसभा और अलग-अलग राज्यों के लिए अलग-अलग विधानसभा चुनावों की प्रक्रिया है ।भारतीय संविधान के भाग 15 में अनुच्छेद 324 से 329 तक निर्वाचन की व्याख्या की गई है ।अनुच्छेद 324 में निर्वाचन का अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण चुनाव आयोग द्वारा चुनाव संपन्न कराने का उल्लेख है। जिसमें नगरीय निकायों का चुनाव राज्य निर्वाचन आयोग व लोकसभा और विधानसभा के लिए भारतीय चुनाव आयोग का नियंत्रण रहता है ।लोकसभा में कुल 545 सदस्य होते हैं ।जिसमें 543 सदस्यों का चुनाव वयस्क मताधिकार प्राप्त मतदाताओं द्वारा प्रत्यक्ष मतदान से किया जाता है। व दो सदस्यों को एंग्लो भारतीय समुदाय का प्रतिनिधित्व करने के लिए राष्ट्रपति द्वारा चुना जाता है।लोकसभा व विधानसभा दोनों का ही कार्यकाल 5 वर्ष का होता है। इनके निर्वाचन के लिए निर्वाचन आयोग द्वारा अधिसूचना जारी करने के बाद संपूर्ण निर्वाचन के तीन चरण होते हैं। जिसमें नामांकन, निर्वाचन तथा मतगणना ।अभी तक लोकसभा और विधानसभाओं के लिए अलग-अलग समय पर चुनाव होते हैं। इन दिनों राजनीतिक गलियारों में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के लिए एक साथ चुनाव कराने की वकालत की जा रही है। यानी एक राष्ट्र एक चुनाव के लिए तर्क दिए जा रहे हैं। जिनमें कहा जा रहा है कि एक ही समय पर चुनाव होने से शासन की दक्षता में सुधार होगा।चुनाव के खर्चे में कमी आएगी। निर्वाचित निकायों में स्थिरता रहेगी ।चुनाव के समय में बचत होगी ।लेकिन अगर जमीनी हकीकत को देखा जाए तो लोकतंत्र के मूलाधार निर्वाचन की समूची प्रणाली ही अर्थ प्रधान हो गई है। इस महंगी निर्वाचन प्रक्रिया में बाहुबली और धन्ना सेठों की पैठ वआधी अधूरी मतदाता सूची ,पढ़े-लिखे व मध्यम वर्ग के मतदान में कम रुचि ,जाति धर्म की सियासत, यहां तक कि सेना और शहीदों पर भी राजनीतिक रोटियां सेकी जा रही है ।ये कुछ ऐसी बुराइयां है जो लोकतंत्र के लिए जानलेवा वायरस है। इन बुराइयों को हटाने के लिए ईमानदारी से चुनाव सुधारों की दिशा में कोई भी राजनीतिक दल काम नहीं करना चाहता है।साथियों क्यों न हम राजनीति को भी समय के साथ चलाएं मतदान प्रक्रिया को ही डिजिटल बनाएं। जिससे चुनाव प्रक्रिया और भी पारदर्शी हो जाए ।जिसमें जातिवाद ,क्षेत्रवाद दबंगई अपना प्रभाव दिखा न  पाए ।जैसे नोटबंदी कर जाली नोटों की करी सफाई। वैसे ही चलो आओ करें राजनीति में फैले कचरे की सफाई ।जैसे बैंक से पैसों के लेन-देन में सुरक्षा कड़ी कर ओ टी पी बनाई वैसे ही सही मतदान हो उसके लिए कोई ओ टी पी बनाएं ।हर मतदाता का मत सुनिश्चित वह सुरक्षित कर पाएं। लेकिन हम तो हर बार चुनाव सुधार की नौटंकी कर आते जनता को तो पक्ष विपक्ष सब मौसेरे भाई नजर आते ।याद करो श्री लाल बहादुर शास्त्री जी जैसे नेता जो अपना सब कुछ देश की जनता के लिए था न्योछावर कर देता। वही देखो ये आज के प्रणेता जो गरीबों की थाली का निवाला भी हर लेता। इन्होंने सिर्फ राजनीति को समझा है व्यापार क्योंकि इन्होंने मतदान के समय बहुत है धन  लुटाया। और फिर कुर्सी मिलते ही चार गुना कमाया। जनता तो सिर्फ अच्छे दिनों की आस लगाए। यह सिर्फ जनता को जुमले सुनाएं। ज्यादातर योजनाएं अमीरों के लिए बनाए ।जब इनके स्वार्थ की बात आए। यह पक्ष- विपक्ष सब एक हो जाए।लेकिन साथियों याद रहे लोकतंत्र में भाग्यविधाता सिर्फ जनता होती है ।न की कोई नेता या प्रणेता। साथियों अगर जनता सोती रहती है तो अच्छे से अच्छा नेता भी भ्रष्ट हो जाता है ।तो साथियों हमें हमारी नींद से जागना होगा। व एक खुशहाल लोकतंत्र की ओर कदम बढ़ाना होगा ।साथियों हमारा यह लोकतंत्र के महान पर्व चुनाव पर प्रकाश डालने का यह प्रयास अच्छा लगा तो वीडियो को ज्यादा से ज्यादा लाइक व शेयर करें ।व अपने मताधिकार को समझते हुए अपने मतदान का सही प्रयोग कर एक जागरूक नागरिक होने का कर्तव्य निभाएं ।इसी प्रकार के और वीडियो देखने के लिए चैनल बाल संसार को सब्सक्राइब करें। लेटेस्ट अपडेट पाने के लिए बैल आइकन पर क्लिक करें।  साथियों हमारे वीडियो फेसबुक पर देखने के लिए हमारे फेसबुक पेज बाल संसार हिंदी को लाइक करें। जय हिंद जय भारत।

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Updated: November 12, 2018 — 3:52 pm

The Author

लेखक:- सविता रामभरोसे

नमस्कार वेबसाइट बाल संसार हिंदी में आपका स्वागत है।सविता जी जिन्होंने हिंदी विषय से  स्नातकोत्तर व बीएड की डिग्री अर्जित की है।श्री रामभरोसे जी ऐसे हैं। भई रामभरोसे 1998 में किसी तरह दसवीं कर पाये ,2006 में 12वीं कर आये, 2012 में स्नातक कर पाये, 2014 में अंग्रेजी साहित्य से स्नातकोत्तर की डिग्री ले आये। आर्टिकल में सब लिखने के बाद सविता जी से चेक करवाये बाल संसार हिंदी के वेब डेवलपर कंटेंट राइटर लेखक सभी की भूमिका यह अकेले ही निभाये। बस इतना ही है। कि आप इनके नाम से परिचित हो जाएं रामभरोसे समझकर इनका साथ निभाएं धन्यवाद

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