जीवन का लक्ष्य

जीवन का लक्ष्य यदि पाना है ,तो सभी जीवो के गुणों को अपनाना है।

छोटे-छोटे जीवो को देखो, लक्ष्य उनसे पाना सीखो।

जैसे मकड़ी जाला बुन- बुन कर, हमें बहुत कुछ सिखाती है।

बार- बार गिरकर उठ -उठकर धीरज और प्रयास दिखाती है।

चींटी भी कितनी मर -मर कर, पंक्ति में चलती जाती है।

समय अनुसार संचय कर -कर, एकता के बल को दर्शाती है।

वैसे ही बीज भी गड़-सड़कर, त्याग और धैर्य बताता है।

एक दिन पेड़ के फल बन- बनकर ,सब को लाभ पहुंचाता है।

छोटा बच्चा भी गिर-गिरकर, उठना चलना सीखता है।

रोककर, हंसकर फिर चल-चलकर,एक दिन दौड़ने लगता है।

अतः जीवन में आगे बढ़-बढ़कर, ऊंचाइयों को जो पाते हैं।

कर्मवीर और आदर्श बन-बनकर भविष्य सुखी बनाते हैं।

The Author

लेखक:- सविता रामभरोसे

नमस्कार वेबसाइट बाल संसार हिंदी में आपका स्वागत है।सविता जी जिन्होंने हिंदी विषय से  स्नातकोत्तर व बीएड की डिग्री अर्जित की है।श्री रामभरोसे जी ऐसे हैं। भई रामभरोसे 1998 में किसी तरह दसवीं कर पाये ,2006 में 12वीं कर आये, 2012 में स्नातक कर पाये, 2014 में अंग्रेजी साहित्य से स्नातकोत्तर की डिग्री ले आये। आर्टिकल में सब लिखने के बाद सविता जी से चेक करवाये बाल संसार हिंदी के वेब डेवलपर कंटेंट राइटर लेखक सभी की भूमिका यह अकेले ही निभाये। बस इतना ही है। कि आप इनके नाम से परिचित हो जाएं रामभरोसे समझकर इनका साथ निभाएं धन्यवाद

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