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अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर भाषण

नमस्कार आज हम बात करेंगे 8 मार्च अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के बारे में। साथियों अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस हर साल 8 मार्च को अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर रही महिला शक्ति का सम्मान करने के लिए मनाया जाता है।साथियों सबसे पहले यह दिन अमेरिका में सोशलिस्ट पार्टी के आव्हान पर 1909 में मनाया गया।1910 में सोशलिस्ट इंटरनेशनल के कोपेनहेगन सम्मेलन में इसे अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का दर्जा दिया गया। तब से हर वर्ष 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में मनाया जाता है। साथियों नारियों में अपरिमित शक्ति और क्षमताएं विद्यमान हैं।उन्होंने जगत के सभी क्षेत्रों में कीर्तिमान स्थापित कर अपने अद्भुत साहस, अथक परिश्रम, बुद्धिमता, मानवीय संवेदना करुणा वात्सल्य जैसे भाव से विश्व पटल पर अपनी पहचान बनाई है। साथियों इनमें से कुछ महान महिलाओं के नाम आपके बीच रखना चाहूंगी। साथियों अगर व्यावसायिक जगत से शुरुआत की जाए तो फेसबुक इंडिया की हैड कीर्थिगा रेड्डी , नेशनल स्टॉक एक्सचेंज की पहली महिला सीईओ चित्रा रामकृष्णन, आईसीआईसीआई बैंक की प्रमुख चंदा कोचर ,भारतीय स्टेट बैंक की चेयर पर्सन अरुंधति भट्टाचार्य, इंडिया आर्ट फेयर की फाउंडर नेहा किरपाल, पेप्सीको कंपनी की चेयर पर्सन इंदिरा नूई ,बालाजी टेलिफिल्म्स की मालिक एकता कपूर, फिक्की की अध्यक्ष नैना लाल किदवई, बेटेन कोलमैन कंपनी की चेयर पर्सन इंदु जैन, माइक्रोसॉफ्ट इंडिया की एमडी नीलम धवन, फैशन डिजाइनर रितु कुमार आदि।वहीं अगर खेल जगत की बात की जाए तो महिला पहलवान गीता और बबीता फोगाट, जिमनास्टिक खेलने वाली अरुणा रेड्डी, वनडे क्रिकेट में 200 विकेट पूरे करने वाली झूलन गोस्वामी, भारत की पहली महिला स्विमर बुला चौधरी ,भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कैप्टन मिताली राज, बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल व पीवी सिंधु भारतीय महिला मुक्केबाज मैरीकॉम आदि।वहीं अगर हमारे स्वतंत्रता संग्राम की बात की जाए तो सशस्त्र विद्रोह कर अंग्रेजों को खदेड़ने वाली झांसी की रानी लक्ष्मीबाई, कर्नाटक के कितूर रियासत की रानी चेन्नम्मा, बेगम हजरत महल, लक्ष्मी सहगल, सरोजिनी नायडू , भीकाजी कामा, प्रति लता वाडेकर ,दुर्गाबाई देशमुख अरुणा आसफ अली, विजय लक्ष्मी पंडित आदि। वही राजनीति विज्ञान, गायन, साहित्य,यहां तक कि जल- थल -नभ हर जगह महिलाओं ने अपनी पहचान बनाई है ।साथियों इस अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर इन सभी महिलाओं के जीवन को अगर देखा जाए तो इन सभी महिलाओं की पहचान इस जगत में पति या पिता से न होकर इनकी अपनी एक व्यक्तिगत पहचान है। हमें इन सभी के जीवन से प्रेरणा ले रूढ़िवादिता से बाहर आकर परिश्रम कर अपनी व्यक्तिगत पहचान बनानी चाहिए ।जय हिंद जय भारत।

Updated: March 15, 2019 — 3:45 pm

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